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ग्रामीण सड़क निर्माण में बिहार नंबर-1, PMGSY के तहत 31 हजार से अधिक गांवों को मिली पक्की सड़क

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बिहार ने 31,287 ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़क से जोड़कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। ग्रामीण सड़क निर्माण और रखरखाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए बिहार को राष्ट्रीय सम्मान भी मिला है।

पटना/आलम की खबर:बिहार ने ग्रामीण सड़क निर्माण और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने के मामले में बिहार ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य सरकार की इस उपलब्धि को ग्रामीण विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में बिहार को यह सम्मान प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर के राज्यों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई, जिसमें बिहार का प्रदर्शन सबसे बेहतर माना गया। ग्रामीण कार्य विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान मिलने के बाद राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों में उत्साह का माहौल है।

आंकड़ों के अनुसार बिहार ने अब तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 31,287 ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ दिया है। यह संख्या देश के किसी भी राज्य से अधिक है। ग्रामीण इलाकों तक सड़क पहुंचने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। गांवों के लोगों को अब हर मौसम में आवागमन की सुविधा मिल रही है, जिससे दैनिक जीवन काफी आसान हुआ है।

ग्रामीण विकास विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ होता है। सड़क बनने से न केवल लोगों की आवाजाही आसान होती है, बल्कि बाजार, अस्पताल, स्कूल और सरकारी सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर होती है। बिहार में पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार इसी सोच का परिणाम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय रैंकिंग में मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां 17,493 ग्रामीण बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ा गया है। वहीं ओडिशा 16,990 बसावटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। बिहार ने इन दोनों राज्यों से काफी आगे निकलकर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। यह अंतर बताता है कि राज्य सरकार ने ग्रामीण सड़क निर्माण को कितनी प्राथमिकता दी है।

ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरकार ने दूर-दराज के गांवों, टोलों और पिछड़े इलाकों तक सड़क पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया। जिन क्षेत्रों में बरसात के दिनों में संपर्क टूट जाता था, वहां भी अब बारहमासी सड़कें बनाई गई हैं। इससे ग्रामीण जनता को बड़ी राहत मिली है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहा है। कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होने से किसानों को भी लाभ मिला है। पहले जिन गांवों तक वाहन पहुंचना मुश्किल होता था, वहां अब एंबुलेंस, स्कूल वाहन और अन्य सेवाएं आसानी से पहुंच रही हैं। कई गांवों में सड़क बनने के बाद छोटे व्यवसाय और स्थानीय व्यापार भी तेजी से बढ़े हैं।

बिहार सरकार का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में मजबूत सड़क नेटवर्क तैयार करना राज्य की विकास नीति का अहम हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य केवल सड़क बनाना नहीं बल्कि गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत करना भी है। सड़क संपर्क बढ़ने से निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी आसान हो जाता है।

सिर्फ सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि उनके रखरखाव और गुणवत्ता के मामले में भी बिहार ने बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के अनुरक्षण और रखरखाव की श्रेणी में बिहार ने बड़े राज्यों के बीच पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। इसे राज्य की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर सड़क निर्माण के बाद उनके रखरखाव की अनदेखी की जाती है, लेकिन बिहार ने इस क्षेत्र में भी सकारात्मक उदाहरण पेश किया है। बेहतर मॉनिटरिंग और नियमित देखरेख के कारण ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने में सफलता मिली है।

राज्य सरकार के मुताबिक आने वाले समय में भी ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को और तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। जिन गांवों तक अब भी बेहतर सड़क संपर्क नहीं पहुंच पाया है, वहां भी प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि बिहार का कोई भी गांव सड़क सुविधा से वंचित न रहे।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण से सामाजिक बदलाव भी तेजी से देखने को मिल रहा है। छात्र-छात्राओं को स्कूल और कॉलेज पहुंचने में आसानी हो रही है। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम हुआ है। वहीं गांवों से शहरों तक व्यापारिक संपर्क मजबूत होने से आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी बिहार की इस उपलब्धि की चर्चा हो रही है। सरकार इसे अपने विकास मॉडल की बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी सड़क निर्माण को अपने जीवन में आए बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मिली यह राष्ट्रीय उपलब्धि बिहार के लिए केवल एक पुरस्कार नहीं बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में यदि इसी गति से काम जारी रहा तो बिहार ग्रामीण आधारभूत संरचना के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में और मजबूत स्थिति बना सकता है

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